“सीमांकन का खेल या ‘सेटिंग’ का मेल? आदेश के बाद भी नहीं हुआ काम, अब कथित ऑडियो ने बढ़ाया बवाल”| Jantatop.Com
तहसील में सीमांकन का एक मामला अब सिर्फ जमीन की नाप-जोख तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कथित तौर पर “सेटिंग” और “लेन-देन” के आरोपों तक पहुंच गया है। आवेदक का आरोप है कि न्यायालय का आदेश हाथ में होने के बावजूद उसे राहत नहीं मिली, उल्टे काम के बदले पैसों की मांग की गई।
मामला ग्रामीण इलाके का बताया जा रहा है, जहां नायब तहसीलदार द्वारा सीमांकन कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि मौके पर पंचनामा भी हुआ, हस्ताक्षर भी कराए गए, लेकिन बाद में कहानी बदल गई।
आवेदक का दावा है कि उसे कथित तौर पर कहा गया कि “कुछ छोड़ दो” और फिर बात पैसों तक पहुंच गई। इतना ही नहीं, आवेदक के पास मौजूद कथित ऑडियो में भी ऐसी बातचीत होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें “साहब नाराज़ हैं” और “पैसा दो तब काम होगा” जैसी बातें सुनाई देने की बात कही जा रही है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब न्यायालय का आदेश मौजूद था तो फिर सीमांकन फाइल में अटक गया या किसी और वजह से रोका गया? क्या आम आदमी को अपने हक के लिए भी राजस्व कार्यालयों के चक्कर काटने और कथित तौर पर जेब ढीली करने की जरूरत पड़ रही है?
कथित ऑडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग पूछ रहे हैं कि यदि आदेश के बाद भी काम नहीं हुआ तो आखिर जिम्मेदार कौन है?
🎧 पूरा कथित ऑडियो सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें—
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“सीमांकन चाहिए? पहले ‘सिस्टम’ समझिए! से आया कथित ऑडियो”
(नोट: समाचार में वर्णित आरोप आवेदक के दावों एवं उपलब्ध कथित ऑडियो पर आधारित हैं। ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों द्वारा संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिल रहा हैँ उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)






