अगर हम आपसे कहें कि आपके सामने से गुजरने वाली चमचमाती नेशनल हाईवे, धड़धड़ाती रेलगाड़ियां और पानी से लबालब नहरें… हकीकत में हैं ही नहीं? चौकिए मत! रायगढ़ जिले के राजस्व विभाग के सरकारी नक्शों को देखकर तो ऐसा ही लगता है। जमीन पर करोड़ों के प्रोजेक्ट्स बन चुके हैं, लेकिन सरकारी कागजों में आज भी वहां खेती हो रही है!
जी हां, रायगढ़ जिले में राजस्व विभाग की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने आम जनता को जमीन के विवादों के जाल में फंसा दिया है। सरकार जमीन ले चुकी है, मुआवजा बंट चुका है, लेकिन नक्शा बदलना पटवारी जी भूल गए!
घपला या लापरवाही? ये 4 केस खोलेंगे आपकी आंखें:
अखबार के पन्नों से निकलकर जो सच सामने आया है, उसे देखकर आप भी कहेंगे—”ये क्या खेल चल रहा है?”
* केस 1: नहर ही गायब हो गई!
रायगढ़ तहसील के ग्राम कलमी में करीब 20 साल पहले ‘केलो परियोजना’ के लिए 24 हेक्टेयर जमीन ली गई थी। जमीन पर नहर बह रही है, लेकिन सरकारी नक्शे में आज भी वो पुरानी जमीन ही दिख रही है। नक्शे से पूरी की पूरी नहर ही गायब है!
* केस 2: दो-दो बार अधिग्रहण, पर रिकॉर्ड वही पुराना!
Gram चिटकाकानी में तो हद ही हो गई। रेल लाइन और सड़क के लिए दो बार जमीन ली गई। नियम कहता है कि नक्शा काटकर उसे रेलवे या PWD के नाम चढ़ाना था, लेकिन रिकॉर्ड आज भी जस का तस है।
* केस 3: 10 साल पुरानी ‘टाइम मशीन’ में अटका बधनपुर!
रायगढ़ से बिलासपुर NH पर आने वाले ग्राम बधनपुर का नक्शा पिछले 10 साल से अपडेट ही नहीं हुआ है। न नक्शे में नेशनल हाईवे (NH) दिख रहा है और न ही नहर।
* केस 4: रेल लाइन बिछ गई, पर नक्शे में नामोनिशान नहीं!
कोयला ढोने के लिए भूपदेवपुर से कारीछापर तक ‘ईस्ट रेल कॉरिडोर’ बिछ गया। 30 गांव इसकी जद में आए, लेकिन भूपदेवपुर का नक्शा उठाकर देखिए—रेलवे लाइन का कोई नामोनिशान ही नहीं है!
असली खेल: एक ही जमीन, दो बार कमाई!
अब आप सोच रहे होंगे कि नक्शा अपडेट न होने से क्या फर्क पड़ता है? फर्क पड़ता है हुजूर, और यहीं से शुरू होता है असली झोलमाल!
1. कागजों में मालिक पुराना: चूंकि नक्शे में नहर या हाईवे नहीं काटा गया, इसलिए रिकॉर्ड में वो जमीन आज भी पुराने भू-स्वामी के नाम पर ही दिख रही है।
2. धड़ाधड़ बिक रही है सरकार की जमीन: ऑनलाइन बी-वन और खसरा देखकर लोग बेधड़क होकर वो जमीन दोबारा दूसरे खरीदारों को बेच रहे हैं, जो सरकार पहले ही खरीद चुकी है!
3. विवादों का अखाड़ा: जब नया खरीदार जमीन पर कब्जा लेने जाता है, तो पता चलता है कि वहां से तो ट्रेन गुजर रही है या नहर बह रही है! इसके बाद शुरू होते हैं कोर्ट-कचहरी के अंतहीन चक्कर।
जनता टॉप का सवाल:
जब सरकार ने जमीन के लिए ‘अवार्ड’ जारी कर दिया, तो पटवारी साहब और राजस्व विभाग के अधिकारी किस बात का इंतजार कर रहे हैं? करोड़ों के लीनियर प्रोजेक्ट्स (रेल, हाईवे, नहर) पूरे हो गए, लेकिन सरकारी नक्शे आज भी पुराने ढर्रे पर क्यों चल रहे हैं? इस लापरवाही से जनता जो आपस में लड़ रही है, उसका जिम्मेदार कौन?
आप क्या सोचते हैं इस महा-लापरवाही पर? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर बताएं और ऐसी ही कड़क खबरों के लिए देखते रहिए ‘जनता टॉप’!