रायगढ़:
कहते हैं छत्तीसगढ़ में सीधे-साधे लोग बसते हैं, लेकिन रायगढ़ के पडिगांव से जो मामला सामने आया है, उसने तो अच्छी-भली थ्रिलर मूवी की पटकथा को भी फेल कर दिया है।
कहानी के मुख्य किरदार हैं कृष्ण कुमार साहू। इन्होंने अपने ही गांव की 0.049 हेक्टेयर जमीन और उसमें बने पक्के मकान का सौदा ₹44.40 लाख में अपने ही परिचितों—मोहम्मद सद्दाम हुसैन और सुरेश मानिकपुरी से किया। 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर बकायदा दस्तखत हुए, नोटरी साहब की मुहर लगी, और पूरी रकम वसूल भी कर ली गई। शर्त बस इतनी सी थी कि मकान पर जो 20-22 लाख का बैंक लोन है, उसे चुकाने के बाद भाईसाहब रजिस्ट्री कराएंगे।
पर कहानी में ट्विस्ट यहाँ खत्म नहीं होता!
‘नगद भी लिया, गाड़ी भी चमकाई!’
मार्च के महीने में कृष्ण बाबू ने एक और दांव खेला। अपनी चमचमाती मारूती ब्रेज़ा गाडी (CG11BP7504) को ₹5 लाख नगद लेकर सद्दाम भाई के हवाले कर दिया। यानी ज़मीन, मकान और गाड़ी… सब बेच-बाच के फुर्सत!
फिर शुरू हुआ असली ड्रामा
जैसे ही वक्त बीता, कृष्ण साहू का मूड बदल गया। पैसे तो जेब में आ चुके थे, लेकिन अब न रजिस्ट्री हो रही थी और न ही मकान हाथ लग रहा था। उल्टे खबर मिली कि साहू जी उसी मकान को किसी तीसरे बंदे के पास गिरवी रखने या बेचने की ‘गुपचुप’ प्लानिंग कर रहे हैं!
जब खरीदार सुरेश मानिकपुरी ने सवाल पूछा, तो जवाब में प्यार-मोहब्बत नहीं, बल्कि सीधे धमकी मिली:
“गांव में तुम्हारी इज्जत नीलाम कर दूंगा, उल्टा तुम ही लोगों को झूठे केस में फंसा दूंगा!
एसएसपी साहब का फोन और तमनार थाने में हड़कंप!
धमकी और धोखाधड़ी से तंग आकर जब पीड़ित जुटमिल थाने पहुंचे और फिर सीधे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन जी के दरबार में हाजिरी लगाई, तब जाकर मामले ने तूल पकड़ा।
एसएसपी साहब ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत तमनार TI को फोन घुमाया और कड़े शब्दों में आदेश जारी कर दिया—मामले की तुरंत जांच करो और त्वरित कानूनी कार्रवाई करो!”
अब पुलिस मैदान में है और विक्रेता साहब के पसीने छूट रहे हैं। देखना यह है कि 44 लाख रुपये की हेराफेरी करने वाले इस ‘सुपर खिलाड़ी’ पर कानून की गाज कब और कितनी कड़क गिरती है!






