अरे भई! सरकारी स्कूलों में बच्चों के बहानों के किस्से तो आपने खूब सुने होंगे—’सर पेट में दर्द है’, ‘मैडम आज कॉपी घर भूल गए’। लेकिन जनाब, यहाँ तो गुरुजी ही बच्चों से दो कदम आगे निकले! स्कूल से गायब रहने के लिए हमारे आदरणीय शिक्षक ऐसे-ऐसी पैंतरेबाज़ी और जुगाड़ अपनाते हैं कि बड़े-बड़े उस्ताद शर्मा जाएं। लेकिन ठहरिए, अब सरकार ने गुरुजी की इस ‘गूगली’ पर डिजिटल ‘योर्कर’ मार दी है।
जी हाँ, स्कूल शिक्षा विभाग ने एक ऐसा नया नियम निकाला है जिसने अच्छे-अच्छे ‘घर बैठे वेतन’ उठाने वाले गुरुजी लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है।
क्या है पूरा माजरा?
सरकार लेकर आई है ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ (VSK) ऐप। अब नियम ऐसा कड़ा है कि जब तक गुरुजी स्कूल के 100 मीटर के दायरे में नहीं आएंगे, तब तक मोबाइल पर हाजिरी का बटन दबेगा ही नहीं। यानी अब ‘रास्ते में हूँ’ या ‘बस पहुँच रहा हूँ’ वाला बहाना सीधे डस्टबिन में! इस ऐप ने शिक्षकों की रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग शुरू कर दी है।
आंकड़ों का ‘कच्चा चिट्ठा’: कहाँ कितने गुरुजी रहे हाजिर?
जब से यह ऐप लागू हुआ है, गुरुजी लोगों में खलबली मची है। कुछ ब्लॉकों में तो फिर भी लाज बच गई, लेकिन कुछ जगह हालत खस्ता है:
टॉपर ब्लॉक खरसिया, तमनार और पुसौर के गुरुजी थोड़े शरीफ निकले, यहाँ उपस्थिति 90% से 93% के बीच रही।
बैकबेंचर ब्लॉक : धरमजयगढ़, घरघोड़ा और रायगढ़ में ग्राफ गिरकर 86% से 88% पर आ गया।
सबसे फिसड्डी सबसे ज्यादा बुरा हाल लैलूंगा और धरमजयगढ़ का है, जहाँ गुरुजी इस कड़े नियम से बचने के लिए अब भी ‘शॉर्टकट और उपाय’ तलाश रहे हैं।
‘किताबों वाला ऐप’ भी निकला फुस्स!
अब जब सरकार गुरुजी पर शिकंजा कस रही है, तो गुरुजी को भी पलटवार का मौका मिल गया। खबर है कि बच्चों की किताबों के क्यूआर कोड को स्कैन करने के लिए बनाया गया पाठ्यपुस्तक निगम का ‘TBC ऐप’ पूरी तरह से फुस्स (फेल) साबित हुआ है।
शिक्षक संगठनों ने तुरंत मोर्चा खोलते हुए कहा—”देखिए साहब! हम तो जनगणना से लेकर चुनाव तक सारा काम टाइम पर करते हैं! अब आपका ऐप ही कबाड़ निकला, तो हम क्या करें?”
खैर, बहानेबाजी चाहे जो भी हो, विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप के रूप में सरकार ने एक तगड़ा डिजिटल चाबुक तैयार कर लिया है। विभाग ने साफ कह दिया है कि शुरुआती ढील खत्म हो चुकी है, अब जो भी गुरुजी ऐप पर ‘एब्सेंट’ दिखे, उनके खिलाफ सीधे कड़क कार्रवाई का हंटर चलेगा!
अब देखना यह है कि गुरुजी इस 100 मीटर के घेरे को तोड़ पाते हैं या चुपचाप स्कूल का रुख करते हैं!






