EXCLUSIVE | रायगढ़ नगर निगम का ‘मैलाथियान घोटाला’? माल लिया असली सप्लायर से, भुगतान किसी और को! पांच साल बाद भी नहीं मिला ₹4.99 लाख, दस्तावेज़ों ने खड़े किए गंभीर सवाल
क्या रायगढ़ नगर निगम में सरकारी धन के भुगतान की व्यवस्था इतनी लचर थी कि करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये बिना वास्तविक सप्लायर तक पहुंचे किसी अन्य खाते में चले गए? या फिर यह सरकारी धन के दुरुपयोग का ऐसा मामला है जिसकी निष्पक्ष जांच कई बड़े चेहरों को बेनकाब कर सकती है?
Jantatop.Com के पास उपलब्ध दस्तावेज़ एक ऐसे मामले की ओर इशारा करते हैं, जिसने नगर निगम की वित्तीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वर्क ऑर्डर, माल सप्लाई, रिसीविंग… फिर भुगतान गायब
दस्तावेज़ों के अनुसार वर्ष 2021 में रायपुर स्थित कामधेनु फाइनेंशियल एडवाइजरी एलएलपी को लगभग ₹4,99,982 मूल्य के 400 बैग मैलाथियान पाउडर की आपूर्ति का वर्क ऑर्डर जारी किया गया। कंपनी का दावा है कि उसने निर्धारित समय पर पूरी सामग्री नगर निगम को उपलब्ध कराई और निगम ने सामग्री प्राप्त होने की आधिकारिक रिसीविंग भी जारी की।
यहीं से कहानी रहस्यमय हो जाती है।
कंपनी का कहना है कि पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी उसे भुगतान नहीं मिला, जबकि निगम के अधिकारियों का कथित दावा है कि इस सामग्री का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।
सबसे बड़ा सवाल—भुगतान आखिर गया किसे?
यदि निगम का दावा सही है कि भुगतान हो चुका है, तो प्रश्न यह है कि भुगतान किसके बैंक खाते में गया? यदि वास्तविक सप्लायर को राशि नहीं मिली, तो क्या भुगतान किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को हुआ? यदि हुआ, तो किस आधार पर?
इन सवालों के जवाब अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
क्या एक ही सामग्री के कई वर्क ऑर्डर जारी हुए?
मामले से जुड़े दस्तावेज़ों और सूत्रों के अनुसार वर्ष 2020–21 के दौरान एक ही प्रकार की सामग्री की खरीदी में एक से अधिक कार्यादेश जारी किए जाने और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका भी सामने आई है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल भुगतान विवाद नहीं बल्कि वित्तीय अनियमितताओं की व्यापक जांच का विषय बन सकता है।
पांच साल से न्याय की प्रतीक्षा
कंपनी का दावा है कि उसने 2021 से लगातार पत्राचार किया, भुगतान की मांग की और संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिए, लेकिन समाधान नहीं हुआ। यदि दस्तावेज़ इस दावे की पुष्टि करते हैं, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है।
जिम्मेदारों से जवाब अब भी बाकी
इस मामले में नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा गया। समाचार प्रकाशित होने तक संबंधित पक्ष से विस्तृत स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं हो सका।
जांच से ही सामने आएगा सच
यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेज़ों और शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसी या न्यायिक प्रक्रिया से ही स्थापित होंगे। यदि दस्तावेज़ सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सरकारी धन के भुगतान, वित्तीय नियंत्रण और प्रशासनिक जवाबदेही की गंभीर जांच की मांग करता है।
Jantatop.Com की मांग
पूरे भुगतान रिकॉर्ड को सार्वजनिक किया जाए।
संबंधित बिल, वाउचर और बैंक भुगतान विवरण की फोरेंसिक जांच हो।
वास्तविक भुगतान किसे हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी जारी की जाए।
यदि अनियमितता पाई जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
(यदि नगर निगम या संबंधित अधिकारी अपना पक्ष देना चाहते हैं, तो Jantatop.Com उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।)