रायपुर।छत्तीसगढ़ के लव-बर्ड्स के लिए एक बड़ी और बेहद सनसनीखेज खबर आ रही है! अगर आप छत्तीसगढ़ में रहते हैं और किसी दूसरे धर्म में दिल लगा बैठे हैं, तो अब सिर्फ ‘दिल मिलना’ काफी नहीं होगा। वक़्फ़ बोर्ड एक ऐसा धांसू नियम लागू करने की फुल तैयारी में है, जो अगस्त 2026 से पूरे सूबे में ‘निकाह’ का पूरा गेम ही पलट कर रख देगा।
अब अगर किसी मुस्लिम युवक या युवती को किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना है, तो भाईसाहब… पहले वक़्फ़ बोर्ड के दफ्तर के चक्कर काटने होंगे और वहां से ‘मंज़ूरी’ की हरी झंडी लानी होगी। सीधे शब्दों में कहें, तो अब वक़्फ़ बोर्ड ही तय करेगा कि आपकी जोड़ी जमेगी या नहीं!
‘लव जिहाद’ और ‘फर्जी आशिकों’ की अब खैर नहीं!
वक़्फ़ बोर्ड ने साफ-साफ कह दिया है कि यह कोई मामूली नियम नहीं है। इस कदम के पीछे का असली मकसद है— कथित “लव जिहाद” पर पूरी तरह फुल स्टॉप लगाना, फर्जी कागजातों के दम पर होने वाली शादियों को रोकना और पहचान छिपाकर धोखा देने वाले ‘फर्जी आशिकों’ को बेनकाब करना। बोर्ड का दावा है कि इससे निकाह की पवित्र प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता आएगी और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।
नियम ऐसे कि अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं:
इस नए फरमान के तहत जो कड़े प्रावधान आ रहे हैं, उन्हें सुनकर ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है:
कुंडली खंगालेगा बोर्ड: निकाह से पहले वक़्फ़ बोर्ड दोनों पक्षों के असली दस्तावेज, उनकी पहचान और सबसे जरूरी— दोनों की मर्जी की बारीक जांच (स्क्रूटनी) करेगा।
धर्म परिवर्तन का ‘कानूनी’ चक्कर: अगर निकाह के लिए धर्म परिवर्तन की जरूरत पड़ती है, तो बिना कानूनी कागजी कार्रवाई और औपचारिकताओं के बात आगे नहीं बढ़ेगी।
मौलवियों का भी लगेगा ‘लाइसेंस’:अब गली-मोहल्ले का कोई भी मौलाना अपनी मर्जी से निकाह नहीं पढ़ा पाएगा। प्रदेश के हर मौलाना का वक़्फ़ बोर्ड में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। सिर्फ ‘लाइसेंसधारी’ यानी पंजीकृत मौलाना ही निकाह करा सकेंगे।
बिना पूछे निकाह कराया, तो नपेंगे मौलाना:अगर किसी मौलाना ने वक़्फ़ बोर्ड की परमिशन के बिना चोरी-छिपे अंतरधार्मिक निकाह कराया, तो उनके खिलाफ सीधे कड़ा लीगल एक्शन लिया जाएगा।
“सियासत होना तो तय है…”
हालांकि, वक़्फ़ बोर्ड का कहना है कि यह नियम किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि शादियों को कानूनी और व्यवस्थित बनाने के लिए है। लेकिन बाबा… छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस फैसले के बाद भूचाल आना तय माना जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि अगस्त 2026 तक इस प्रस्तावित नियम पर क्या अंतिम मुहर लगती है और इस पर कितनी ‘चटपटी’ सियासत गरमाती है!