रायगढ़ (Jantatop.com)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला भू-घोटाला सामने आया है, जिसकी शुरुआत तो जन-आस्था से हुई थी, लेकिन उसका अंत करोड़ों रुपये के ज़मीन खेल और रसूखदारों के आलीशान कब्ज़े के साथ हुआ। Jantatop.com के हाथ लगे सुरागों के मुताबिक, इस पूरे मामले को लेकर अब स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता बिलासपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की बड़ी तैयारी में हैं।
क्या है पूरा मामला? बाबा की तपस्या से जुड़ी है शुरुआत
मामले की जड़ें कुछ साल पुरानी हैं। रायगढ़ के स्थानीय क्षेत्र में जब प्रसिद्ध तपस्वी सत्यनारायण बाबा जी तपस्या पर बैठे, तो वह भूमि पहले से ही कुछ लोगों को आवंटित की जा चुकी थी। हालांकि वहां कोई परिवार रह नहीं रहा था। जन-आस्था और बाबा जी की तपस्या को देखते हुए तत्कालीन जिला कलेक्टर ने एक बड़ा फैसला लिया। बाबा जी के तपस्या स्थल वाली उस ज़मीन के बदले, उन आवंटनधारियों को दूसरी जगह यानी श्मशान और कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर बदले में आवंटन (Alternative Allotment) दे दिया गया।
जनता की आस्था का सम्मान करने के लिए लिया गया यह प्रशासनिक फैसला उस समय तो सही था, लेकिन बाद में यही बदली हुई जमीन भू-माफियाओं के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन गई।
बदले में मिली ज़मीन पर रसूखदारों ने मार ली बाजी!
नियमों के मुताबिक, सरकार द्वारा विशेष परिस्थितियों या अदला-बदली में जो शासकीय भूमि आवंटित की जाती है, वह अ-हस्तांतरणीय श्रेणी में आती है। यानी उस ज़मीन को न तो आगे बेचा जा सकता है और न ही उस पर कोई व्यावसायिक निर्माण हो सकता है। अगर बेचना भी हो, तो कलेक्टर की विशेष अनुमति और कड़ी कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य होती है।
परंतु, असली खेल यहीं से शुरू हुआ। जैसे ही श्मशान की यह बेशकीमती ज़मीन उन लोगों को बदले में आवंटित हुई, स्थानीय बड़े बिल्डरों, रसूखदारों और भू-माफियाओं की नज़र इस पर पड़ गई। आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से उन आवंटनधारियों को पैसों का लालच देकर या कागज़ात में हेरफेर करके उनके नाम की रजिस्ट्री अपने पक्ष में करा ली गई। देखते ही देखते श्मशान और चरनोई की इस सरकारी भूमि पर आलीशान वीआईपी बंगले, प्रीमियम विला और पॉश कॉलोनियां खड़ी कर दी गईं।
कलेक्टर से शिकायत और हाई कोर्ट कूच की तैयारी
मुर्दों की शांति और मवेशियों के चारे के लिए आरक्षित इस सरकारी ज़मीन पर जब रसूखदारों की गाड़ियां दौड़ने लगीं, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। Jantatop.com की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के बाद स्थानीय जागरूक नागरिक और पीड़ित ग्रामीण इस पूरे अदला-बदली के खेल और उसके बाद हुई अवैध खरीद-बिक्री की कड़ियों की जांच के लिए वर्तमान जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपने जा रहे हैं।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर प्रशासन ने इस पर तुरंत एक्शन लेते हुए आवंटन की शर्तों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों की रजिस्ट्रियां निरस्त नहीं कीं, तो वे बिलासपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे, जिसकी कागजी तैयारी पूरी कर ली गई है।
अब देखना बाकी है कि बाबा की तपस्या की आड़ में श्मशान की सरकारी ज़मीन डकारने वाले इन रसूखदारों पर प्रशासन पहले चाबुक चलाता है या फिर यह मामला सीधे हाई कोर्ट की दहलीज पर गूंजेगा
जल्द होगा नामों का खुलासा: रसूखदारों की सूची तैयार!
इस पूरे खेल में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वो कौन से रसूखदार, सफेदपोश और बड़े बिल्डर हैं, जिन्होंने मुर्दों की ज़मीन पर अपने सपनों के महल खड़े कर लिए? Jantatop.com की खोजी टीम उन नामों और रजिस्ट्रियों के दस्तावेजों को खंगालने में जुटी है, जिनके तहत गरीब आवंटनधारियों से यह ज़मीन औने-पौने दामों में हथियाई गई। सूत्रों के मुताबिक, इस लिस्ट में रायगढ़ के कुछ ऐसे रसूखदार नाम शामिल हैं, जिनके सामने आते ही प्रशासनिक अमले में बड़ा भूचाल आना तय है। Jantatop.com बहुत जल्द इन रसूखदारों के नामों का खुलासा अपनी अगली कड़ियाँ (Part-2) में करने जा रहा है।