रायगढ़। रायगढ़ जिला भाजपा के भीतर इन दिनों सांगठनिक नियुक्तियों और समीकरणों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। पार्टी के भीतर संतुलन साधने की कवायद के बीच, कैबिनेट मंत्री और रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी की एक बड़ी पहल सामने आई है। सालों से पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचने वाले वरिष्ठ नेता मंजुल दीक्षित को प्रदेश संगठन में अहम जिम्मेदारी मिलना स्थानीय राजनीति में एक बड़ा और स्वागत योग्य कदम माना जा रहा है।
3 दशक का निस्वार्थ सफर: जनता के बीच बनाई पहचान
मंजुल दीक्षित का राजनीतिक सफर भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष के रूप में शुरू हुआ था। बीते तीन दशकों से भी अधिक समय से उन्होंने बिना किसी पद या लालच के संगठन को मजबूत करने का काम किया है। रायगढ़ और खरसिया विधानसभा की जनता के बीच उनकी छवि ऐसी है कि लोग उन्हें सीधे भाजपा के ‘कमल फूल’ का पर्याय मानते हैं। मंजुल दीक्षित ने यह साबित किया है कि असली नेता किसी पद की बैसाखी से नहीं, बल्कि जनता के बीच लगातार सक्रिय रहकर बनता है।
जहाँ ‘प्रवासियों’ को जगह, वहाँ मूल कार्यकर्ताओं का भी हक
राजनीतिक गलियारों में यह बात लगातार उठ रही थी कि पार्टी में संतुलन होना बेहद जरूरी है। हाल ही में विपक्षी खेमे से आए ‘प्रवासी’ नेताओं, खासकर खुद को ‘गेरवानी नरेश’ के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहे एक पूर्व कांग्रेसी नेता को भाजपा में आए अभी जुम्मा-जुम्मा चार दिन ही हुए हैं। लेकिन जिला संगठन में उन्हें फिट करने के लिए विशेष जतन किए गए और एक नए पद का ‘आविष्कार’ कर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें जिला अध्यक्ष की करीबी का विशेष लाभ भी मिल रहा है। वे पार्टी में खुद को इस तरह प्रस्तुत कर रहे हैं मानो उनकी राजनीतिक शुरुआत ही भाजपा के झंडे के नीचे हुई हो।
भले ही मंजुल दीक्षित के कद और उनकी लोकप्रियता के आगे इन प्रवासियों को कोई फर्क न पड़ता हो, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जाना जरूरी था कि केवल सत्ता की मलाई चाटने वालों को ही तवज्जो नहीं मिलेगी। चर्चा है कि नेता जनता के बीच से आता है, न कि जिला पदाधिकारीयों को विशेष लाभ या कमाई उगाही कराने के शॉर्टकट से। ऐसे में जब बाहर से आए लोगों को पदों से नवाजा जा रहा है, तो तीन दशक से वफादारी निभाने वाले जमीनी नेताओं का हक सबसे पहले बनता है।
मंत्री ओपी चौधरी ने साधा संतुलन, दिलाया वास्तविक सम्मान
मूल कार्यकर्ताओं की इसी चिंता और हक की बात को रायगढ़ विधायक व कद्दावर मंत्री ओपी चौधरी ने प्रमुखता से समझा। उन्होंने संगठन में वरिष्ठ और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को ससम्मान मंच और स्थान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
ओपी चौधरी की पहल पर मंजुल दीक्षित का नाम भारतीय जनता पार्टी व्यवसायिक प्रकोष्ठ, छत्तीसगढ़ प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी के रूप में आगे बढ़ाया गया है। इस फैसले से संगठन में एक सही संतुलन बनता दिख रहा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि जहाँ प्रवासियों को पद मिल रहे हैं, वहाँ मंजुल दीक्षित जैसे समर्पित नेता को यह जिम्मेदारी मिलना सच्चे अर्थों में जमीनी निष्ठा का सम्मान है।