Jantatop.Com | जनहित की बात
रायगढ़। अगर कोई आम आदमी बिजली का बिल नहीं भरता है, तो कुछ ही दिनों में नोटिस आ जाता है और कार्रवाई शुरू हो जाती है। लेकिन रायगढ़ के 16 उद्योगों पर ₹204 करोड़ से अधिक का विद्युत शुल्क बकाया है और यह राशि वर्षों से बढ़ती चली गई है।
यह मामला सिर्फ बकाया राशि का नहीं, बल्कि जनता के अधिकार, सरकारी जवाबदेही और रायगढ़ के भविष्य का भी है।
रायगढ़ ने उद्योगों को जमीन दी, पानी दिया और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने का अवसर दिया। बदले में जनता को क्या मिला? बढ़ता प्रदूषण, धूल-धुआं, भारी वाहनों का दबाव और अब करोड़ों रुपये के बकाया का मामला।
जानकारी के अनुसार, मुख्य विद्युत निरीक्षक कार्यालय रायपुर प्लांटों द्वारा स्वयं उपयोग की गई बिजली पर शुल्क की गणना कर नोटिस जारी करता है। इसके बाद वसूली के लिए उद्योग विभाग को बार-बार पत्र भेजे जाते हैं, लेकिन वसूली की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती।
यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने वर्षों तक करोड़ों रुपये का बकाया बढ़ता कैसे रहा और जिम्मेदार विभागों ने समय पर सख्ती क्यों नहीं दिखाई?
जिन उद्योगों पर बकाया बताया गया है
टीआरएन एनर्जी – ₹101.95 करोड़
रायगढ़ इस्पात – ₹62.46 करोड़
सिंघल स्टील – ₹24.33 करोड़
रुक्मणी बायोमास – ₹13 करोड़
मां काली एलॉयज – ₹9.48 करोड़
सुनील इस्पात – ₹9.37 करोड़
रूपाणाधाम स्टील – ₹8.47 करोड़
सिंघल इंटरप्राइजेज – ₹5.80 करोड़
स्काई एलॉयज – ₹3.51 करोड़
श्याम इस्पात – ₹1.78 करोड़
मां मंगला इस्पात – ₹1.39 करोड़
झाकमझोरी इस्पात – ₹92.47 लाख
सन स्टील कंपनी – ₹55.57 लाख
रायगढ़ की जनता पहले से क्या झेल रही है?
खराब होती हवा
बढ़ता प्रदूषण और उड़ती राख
दिन-रात भारी वाहनों का दबाव
प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता बोझ
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा
अब जनता को यह सवाल पूछना होगा
अगर आम आदमी के लिए नियम सख्त हैं, तो करोड़ों रुपये बकाया रखने वालों पर वर्षों तक नरमी क्यों?
अगर उद्योग रायगढ़ के संसाधनों का उपयोग करते हैं, तो उनकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
एक बात याद रखिए
रायगढ़ सिर्फ उद्योगों का नहीं, यहां रहने वाली लाखों लोगों का भी है।
अगर मुनाफा कुछ लोगों का हो और उसकी कीमत पूरी जनता चुकाए, तो उस व्यवस्था पर सवाल उठाना जरूरी है।
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