रायगढ़। जिले में विधानसभा चुनाव का माहौल नहीं है, फिर भी राजनीतिक गलियारों में हलचल किसी चुनाव से कम नहीं है। वजह है भारतीय युवा कांग्रेस का संगठनात्मक चुनाव। नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही रायगढ़ की सियासत का तापमान अचानक बढ़ गया है। शहर से लेकर खरसिया, पुसौर, धरमजयगढ़ और लैलूंगा तक कार्यकर्ताओं के बीच एक ही चर्चा है – आखिर युवा कांग्रेस की कमान किसके हाथ जाएगी?
नाम पॉलिटिक्स’ से बिगड़ा समीकरण
इस चुनाव की सबसे चर्चित बात उम्मीदवारों के नाम को लेकर है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार प्रमुख दावेदारों को पटखनी देने के लिए उनके नाम से मिलते-जुलते प्रत्याशियों को मैदान में उतारा गया है।
शहर अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार आरिफ हुसैन के सामने एक और आरिफ हुसैन ने नामांकन किया है। इसी तरह प्रदेश महासचिव पद के दावेदार अनमोल अग्रवाल और आशीष जायसवाल के नाम से भी डमी उम्मीदवारों के फॉर्म जमा हुए हैं। माना जा रहा है कि इस रणनीति के पीछे मतदाताओं को भ्रमित कर वोटों का गणित बिगाड़ने की मंशा है।
उमेश पटेल बनाम देवेंद्र यादव: असली मुकाबला
कहने को यह युवाओं का चुनाव है, लेकिन पर्दे के पीछे पूर्व मंत्री उमेश पटेल और विधायक देवेंद्र यादव के गुटों के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।
खरसिया विधानसभा क्षेत्र इस बार सबसे हॉट सीट बना हुआ है। यहां उमेश पटेल समर्थक प्रवीण पांडेय के सामने देवेंद्र यादव गुट से जुड़े आकाश मिश्रा चुनाव मैदान में हैं। वहीं शहर जिला अध्यक्ष पद पर उमेश पटेल गुट के आरिफ हुसैन और देवेंद्र यादव गुट के रितेश तिवारी के बीच कांटे की टक्कर है।
महिला उम्मीदवार और प्रदेश स्तर की खींचतान
शहर अध्यक्ष पद की रेस में संजना श्रीवास्तव के उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संजना के पीछे उमेश पटेल गुट के रवि पाण्डेय की सक्रिय भूमिका है।
उधर प्रदेश महासचिव पद के लिए भी रायगढ़ से अनमोल अग्रवाल और प्राची दुबे के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। अनमोल को उमेश पटेल गुट और प्राची को देवेंद्र यादव गुट से जुड़ा माना जा रहा है।
क्या कहते हैं दावेदार
आरिफ हुसैन का दावा है कि उन्होंने एनएसयूआई के समय से संगठन के लिए काम किया है और कार्यकर्ताओं का समर्थन उनके साथ है। वहीं रितेश तिवारी खुद को जमीनी कार्यकर्ता बताते हुए वफादारी के आधार पर वोट मांग रहे हैं।
संगठन के किसी भी वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक रूप से किसी का नाम नहीं लिया है। जीत-हार का फैसला अब डिजिटल सदस्यता और वोटिंग प्रक्रिया के बाद ही होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे न सिर्फ युवा कांग्रेस का नेतृत्व तय करेंगे, बल्कि आने वाले समय में रायगढ़ कांग्रेस की दिशा भी तय करेंगे।






