सिंघल स्टील के मेगा प्लांट पर बवाल! 1.08 करोड़ लीटर पानी रोज, लाखों टन फ्लाई ऐश, EIA रिपोर्ट पर सवाल… क्या रायगढ़ के भविष्य से हो रहा है समझौता? सिंघल स्टील प्लांट पर जनता का प्रहार… ‘रायगढ़ कोई प्रयोगशाला नहीं साहेब!'”
पतरापाली, कोतरलिया और सियारपाली में प्रस्तावित सिंघल स्टील प्राइवेट लिमिटेड के मेगा स्टील प्लांट को लेकर 6 जुलाई की जनसुनवाई से पहले विवाद गहरा गया है। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि जिस परियोजना का भविष्य आने वाले कई दशकों तक रायगढ़ के पर्यावरण, पानी और लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, उसकी जनसुनवाई से पहले हर तथ्य की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल परियोजना में प्रस्तावित 10,830 KLD यानी प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ 8 लाख 30 हजार लीटर पानी के उपयोग को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में पानी का स्रोत क्या होगा? यदि भूजल या स्थानीय जल स्रोतों पर दबाव बढ़ा तो आने वाले वर्षों में गांवों के हैंडपंप, कुएं, तालाब और किसानों की सिंचाई पर क्या असर पड़ेगा? क्या भविष्य के जल संकट का कोई ठोस आकलन जनता के सामने रखा गया है?
राख का पहाड़… और फिर वही फ्लाई ऐश का डर?
रायगढ़ पहले से ही फ्लाई ऐश और औद्योगिक प्रदूषण के मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यदि प्रस्तावित परियोजना से हर वर्ष लाखों टन फ्लाई ऐश निकलेगी, तो उसका सुरक्षित निपटान कैसे होगा? यदि निगरानी कमजोर रही, तो उड़ती राख खेतों, घरों, स्कूलों और जल स्रोतों तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि पहले से प्रदूषण झेल रहे क्षेत्र में एक और बड़े उद्योग के पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीर अध्ययन होना चाहिए।
सिर्फ उद्योग नहीं, लोगों की सांसों का भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि उद्योग के साथ ट्रकों की आवाजाही, कोयला, कच्चा माल, धूल और औद्योगिक उत्सर्जन भी बढ़ेगा। उनका सवाल है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था भविष्य में कमजोर पड़ी तो इसका असर बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर कौन देखेगा?
EIA रिपोर्ट पर उठे सवाल
विरोध कर रहे पक्ष का आरोप है कि परियोजना की EIA (पर्यावरण प्रभाव आकलन) रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर गंभीर आपत्तियां हैं। उनका कहना है कि यदि रिपोर्ट में दी गई जानकारियों पर ही विवाद है, तो पहले स्वतंत्र विशेषज्ञों से उसकी जांच होनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि जनता को पूरी और सही जानकारी के आधार पर ही अपनी राय देने का अवसर मिलना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल अधिकारियों से…
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज अनुमति देने वाले अधिकारी कल किसी दूसरे जिले में चले जाएंगे, लेकिन यदि जल संकट बढ़ा, हवा प्रदूषित हुई, खेती प्रभावित हुई या लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ा, तो उसकी कीमत रायगढ़ की जनता और आने वाली पीढ़ियों को ही चुकानी पड़ेगी।
लोगों का कहना है कि “फाइलें बंद हो जाती हैं, अधिकारी बदल जाते हैं, लेकिन प्रदूषण की मार वर्षों तक खत्म नहीं होती। इसलिए जनसुनवाई से पहले हर दस्तावेज, हर दावा और हर पर्यावरणीय पहलू की निष्पक्ष जांच जरूरी है।”
जनता की मांग
विरोध कर रहे लोगों ने मांग की है कि 6 जुलाई की प्रस्तावित जनसुनवाई को फिलहाल स्थगित कर पहले EIA रिपोर्ट, जल स्रोत, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था, फ्लाई ऐश प्रबंधन और अन्य पर्यावरणीय पहलुओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
अब निगाहें प्रशासन पर हैं। क्या पहले जनता के सवालों का जवाब मिलेगा या फिर जनसुनवाई केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाएगी?
— Jantatop.Com | सवाल जनता के, जवाब जिम्मेदारों से