📰 Jantatop.Com | विशेष रिपोर्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी मोहर्रम, उर्स और अन्य इस्लामी धार्मिक आयोजनों को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अब सभी धार्मिक आयोजन केवल कुरान, हदीस और शरीयत के अनुरूप ही आयोजित किए जाएंगे। धार्मिक आयोजनों में डीजे, धुमाल, बैंड-बाजा, नाच-गान और आतिशबाजी जैसी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने सभी ताजिया कमेटियों, उर्स कमेटियों, दरगाह प्रबंधन समितियों, मुतवल्लियों और इंतजामिया कमेटियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य इमाम हुसैन और शहीद-ए-कर्बला की कुर्बानियों को याद करना है, इसलिए कार्यक्रमों को सादगी, अनुशासन और सम्मान के साथ संपन्न कराया जाए।
⚠️ किसी भी सूरत में नहीं चलेगा डीजे
वक्फ बोर्ड ने अपने निर्देश में कहा है कि धार्मिक आयोजनों की आड़ में मनोरंजन आधारित गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। डीजे, धुमाल, पेशेवर नृत्य, तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम और आतिशबाजी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार स्थानीय प्रशासन और पुलिस को भी इन निर्देशों के पालन को लेकर सूचित किया गया है।
💰 नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई
निर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित समिति के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई, मान्यता समाप्त करने और समिति को भंग करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में साउंड सिस्टम जब्त करने का भी उल्लेख किया गया है।
🕌 मस्जिदों से भी की गई अपील
वक्फ बोर्ड ने मस्जिदों के इमामों और स्थानीय समितियों से अपील की है कि जुमे की नमाज के दौरान इन दिशा-निर्देशों की जानकारी समाज तक पहुंचाई जाए ताकि मोहर्रम और उर्स के आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकें।
⚠️ सोशल मीडिया पर भ्रम भी फैल रहा
सोशल मीडिया पर “छत्तीसगढ़ में अब शरिया लागू हो गया” जैसी हेडलाइन तेजी से वायरल हो रही हैं, जबकि यह दावा सही नहीं है। यह कोई सरकारी कानून नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा मुस्लिम धार्मिक आयोजनों से जुड़ी समितियों के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देश हैं।
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