“गरीबों की झोपड़ी पर बुलडोजर… लेकिन रसूखदार कॉलोनाइजर पर प्रशासन मौन!”
कैदीमूड़ा में सरकारी जमीन और नाले पर कब्जे का आरोप, शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
रायगढ़ के वार्ड क्रमांक 30 स्थित कैदीमूड़ा में शासकीय भूमि और सार्वजनिक नाले पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मोहल्लेवासियों का आरोप है कि जहां प्रशासन गरीबों की झुग्गी-झोपड़ी हटाने के लिए पूरा सरकारी लाव-लश्कर लेकर पहुंच जाता है, वहीं रसूखदार कॉलोनाइजरों के सामने अधिकारियों की कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है।
दस्तावेजों के अनुसार 25 मार्च 2026 और 13 अप्रैल 2026 को SDM, कलेक्टर और जनदर्शन में शिकायत दी गई थी। आवेदन में साफ लिखा गया कि खसरा नंबर 221/1/ख सहित शासकीय भूमि और सार्वजनिक नाले पर कब्जा कर अवैध प्लॉटिंग और निर्माण किया जा रहा है।

इतना ही नहीं, शिकायत में बारिश के दौरान संभावित जलभराव, बीमारी और जनहानि तक की आशंका जताई गई थी। बावजूद इसके, महीनों बीत जाने के बाद भी नजूल विभाग और नगर निगम की तरफ से कोई बड़ी कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दी।
“कागजों में आदेश… जमीन पर सन्नाटा”
कलेक्टर कार्यालय से निर्देश जारी हुए, SDM ने भी नजूल अधिकारी को सीमांकन और कार्रवाई के आदेश भेजे, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरा मामला फाइलों में ही दबा दिया गया। इस बीच कथित कॉलोनाइजर द्वारा पक्का निर्माण भी लगभग पूरा कर लिया गया।

- नाला अतिक्रमण दिन दहाड़े
मोहल्लेवासियों का कहना है कि—
“अगर यही कब्जा किसी गरीब ने किया होता, तो अब तक बुलडोजर चल चुका होता। लेकिन यहां बड़े लोगों का मामला है, इसलिए अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।”
RTI का भी नहीं दिया जवाब
स्थानीय नागरिकों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी कार्रवाई की जानकारी मांगी, लेकिन 30 दिन से अधिक समय गुजरने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। इससे प्रशासन की पारदर्शिता और नीयत दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल…
क्या सरकारी जमीन पर कॉलोनी काटने वालों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?
आखिर नजूल विभाग और निगम कमिश्नर कार्रवाई से बच क्यों रहे हैं?







