- रायगढ़ | JantaTop रिपोर्ट
- रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में एक बार फिर विकास बनाम अस्तित्व की लड़ाई तेज हो गई है। 19 मई को प्रस्तावित पेलमा ओपन कास्ट कोल माइन परियोजना की पर्यावरण जनसुनवाई से पहले ही पूरे इलाके में विरोध का माहौल बन गया है।
ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह परियोजना जल, जंगल और जमीन पर सीधा असर- डालने वाली है। उनका कहना है कि सरकारी कंपनी के नाम पर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जबकि नुकसान स्थानीय जनता को उठाना पड़ेगा।
क्या है पेलमा कोल माइन प्रोजेक्ट?- क्या है पेलमा कोल माइन प्रोजेक्ट?
परियोजना: पेलमा ओपन कास्ट कोल माइन
कंपनी: SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड)
उत्पादन क्षमता: 15 मिलियन टन प्रति वर्ष (15 MTPA)
कुल क्षेत्र: लगभग 2077 हेक्टेयर
परियोजना: पेलमा ओपन कास्ट कोल माइन
कंपनी:उत्पादन क्षमता: 15 मिलियन टन प्रति वर्ष (15 MTPA)
यह एक बड़ी खनन परियोजना है, जिसके लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण किया जाना है।
362 हेक्टेयर जंगल पर खतरा
EIA रिपोर्ट के अनुसार:
करीब 362 हेक्टेयर जंगल की कटाई
पहले से प्रदूषण झेल रहे इलाके पर अतिरिक्त दबाव
रायगढ़ शहर तक कोयला धूल पहुंचने की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है:“पहले ही धूल और राख से परेशानी है, अब जंगल कटे तो हालात और खराब होंगे।”
निजी कंपनी की भूमिका पर सवाल
परियोजना को लेकर विवाद की बड़ी वजह:
MDO (Mine Developer & Operator) मॉडल के तहत संचालन
करीब 20 साल तक खदान का काम निजी कंपनी के हाथ में
डिजाइन, फाइनेंसिंग और संचालन निजी स्तर पर
ग्रामीणों का आरोप:“नाम सरकारी, फायदा निजी — और नुकसान जनता का।”
9 गांवों पर विस्थापन का खतरा
इस परियोजना से प्रभावित गांव:
पेलमा
उरबा
मदुवाडुमर
लालपुर
हिंझर
जरहीडीह
साकता
मिलुपारा
खर्रा
इनमें से कई गांवों के पूरी तरह उजड़ने की आशंका है। स्थानीय आदिवासी और ग्रामीण अपनी जमीन और आजीविका को लेकर चिंतित हैं।
PESA कानून पर उठे सवाल
क्षेत्र पेसा (PESA) कानून के अंतर्गत आता है
ग्रामसभा की सहमति जरूरी होती है
आरोप है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहमति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
साथ ही, घरघोड़ा से पेलमा तक प्रस्तावित रेलवे लाइन का भी विरोध जारी है।
🔥 तमनार: पहले भी रहा संघर्ष का केंद्र
तमनार में पहले भी कई बार औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर विरोध हुआ है:
कोल प्रोजेक्ट्स के खिलाफ आंदोलन
जनसुनवाई को लेकर विवाद
कई बार तनावपूर्ण स्थिति
🚨 19 मई: प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा
अब सबसे बड़ा सवाल:
क्या जनसुनवाई शांतिपूर्ण होगी?
या फिर एक बार फिर बड़ा आंदोलन देखने को मिलेगा?
प्रशासन के लिए यह एक अहम परीक्षा बन चुकी है।
🛑 बड़ी तस्वीर: सिर्फ जमीन नहीं, भविष्य का सवाल
यह मुद्दा सिर्फ कुछ गांवों तक सीमित नहीं है:
बढ़ता प्रदूषण
उड़ती राखभूजल पर असर
स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं
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