“जो लोग अपने लिए जीते हैं, उनका ज़िक्र कुछ दिनों तक होता है, लेकिन जो समाज के लिए जीते हैं, उनकी फ़िक्र पीढ़ियाँ करती हैं।”
बाहर से कठोर, भीतर से कोमल… सिद्धांतों पर अडिग और जनसेवा के प्रति पूर्ण समर्पित, स्वर्गीय रोशनलाल अग्रवाल जी का व्यक्तित्व कुछ ऐसा ही था।
राष्ट्रवाद उनके लिए नारा नहीं, जीवन का संस्कार था। पत्रकारिता उनके लिए व्यवसाय नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ थी और जनसेवा उनके जीवन की साधना।
रायगढ़ की राजनीति में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसके पास उनकी कोई याद सुरक्षित न हो। किसी के हिस्से उनकी डांट आई, किसी को उनका अनुशासन मिला, तो किसी ने उस कठोरता के पीछे छिपा उनका अथाह स्नेह महसूस किया।
उनकी फटकार याद है, उनका स्नेह याद है, उनका मार्गदर्शन याद है… क्योंकि उन्होंने सिर्फ राजनीति नहीं की, लोगों के जीवन को गढ़ा।
वो शख्स नहीं, एक सोच थे… वो पद नहीं, विश्वास थे… वो भीड़ का हिस्सा नहीं, रायगढ़ की पहचान थे।
ऐसे व्यक्तित्व रोज़ पैदा नहीं होते, वे पीढ़ियाँ तैयार करते हैं और फिर इतिहास बन जाते हैं।
जननेता, राष्ट्रवादी चिंतक, समाजसेवी और जनकर्म के संस्थापक स्वर्गीय रोशनलाल अग्रवाल जी को जयंती पर कोटि-कोटि नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।
- आप सिर्फ याद नहीं किए जाते… आप महसूस किए जाते हैं।





