समय बदलता है, परिस्थितियाँ बदलती हैं, तकनीक बदलती है और पत्रकारिता के माध्यम भी बदलते रहते हैं। लेकिन कुछ संस्थान ऐसे होते हैं जो समय की हर कसौटी पर खरे उतरते हुए स्वयं एक परंपरा बन जाते हैं। ‘जनकर्म’ ऐसा ही एक नाम है, जिसने दशकों से केवल समाचार नहीं दिए, बल्कि समाज की चेतना को शब्द, जनभावनाओं को स्वर और लोकतंत्र को सशक्त आधार प्रदान किया है।
समाचार पत्र का मूल्य उसके कागज़ या मुद्रण से नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता, निष्पक्षता और जनसरोकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से तय होता है। यही मूल्य जनकर्म की सबसे बड़ी पूंजी रहे हैं। इस समाचार पत्र ने सदैव यह सिद्ध किया कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक नैतिक दायित्व है।
10 जुलाई 1992 को जननेता स्वर्गीय रोशन लाल अग्रवाल जी ने जिस विचार और संकल्प के साथ दैनिक जनकर्म की स्थापना की थी, वह केवल एक समाचार पत्र शुरू करने का प्रयास नहीं था, बल्कि समाज को एक ऐसा मंच देने का सपना था जहाँ आम नागरिक की आवाज़ बिना किसी भय, पक्षपात और स्वार्थ के प्रकाशित हो सके। उन्होंने पत्रकारिता को जनसेवा का माध्यम माना और उसी विचारधारा ने जनकर्म को एक विशिष्ट पहचान प्रदान की।
पिछले 34 वर्षों में जनकर्म ने अनगिनत सामाजिक सरोकारों, जनआंदोलनों, विकास के प्रश्नों, किसानों, श्रमिकों, व्यापारियों, युवाओं, महिलाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक की पीड़ा और अपेक्षाओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्ति दी है। सत्ता से प्रश्न पूछने का साहस और समाज की सकारात्मक उपलब्धियों का सम्मान—दोनों का संतुलन बनाए रखना ही इसकी पत्रकारिता की सबसे बड़ी शक्ति रही है।
पत्रकारिता का स्वरूप आज डिजिटल युग में तेजी से बदल रहा है। सूचनाओं की गति बढ़ी है, प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, लेकिन सत्य की आवश्यकता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी तीन दशक पहले थी। ऐसे समय में जनकर्म ने अपनी मूल विचारधारा को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक पत्रकारिता के नए आयामों को अपनाया है। यही उसकी जीवंतता और प्रासंगिकता का प्रमाण है।
आज श्री गौतम अग्रवाल के कुशल संपादकीय नेतृत्व में जनकर्म अपनी गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए निष्पक्ष, जिम्मेदार और जनपक्षधर पत्रकारिता की मशाल को पूरी निष्ठा से प्रज्वलित रखे हुए है। यह केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि उन मूल्यों की निरंतर यात्रा है जिन्हें स्वर्गीय रोशन लाल अग्रवाल जी ने अपने विचारों और कर्म से स्थापित किया था।
जनकर्म के 35वें स्थापना दिवस के पावन अवसर पर मैं संस्थापक स्वर्गीय रोशन लाल अग्रवाल जी की पुण्य स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ। उनका दूरदर्शी चिंतन, जनसेवा का भाव और निष्पक्ष पत्रकारिता का आदर्श आज भी जनकर्म की प्रत्येक पंक्ति में जीवंत है।
साथ ही आदरणीय श्री गौतम अग्रवाल, जनकर्म परिवार के सभी पत्रकारों, कर्मचारियों, सहयोगियों, विज्ञापनदाताओं तथा लाखों पाठकों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
ईश्वर से प्रार्थना है कि जनकर्म सत्य की ज्योति, जनविश्वास की शक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों की इस गौरवशाली परंपरा को आने वाले वर्षों में भी नई ऊर्जा, नई ऊँचाइयों और नई पीढ़ियों तक पहुँचाता रहे। क्योंकि कुछ संस्थान केवल इतिहास नहीं लिखते, वे स्वयं इतिहास बन जाते हैं—जनकर्म उन्हीं में से एक है