"50 लाख का कबाड़?" "वॉटर एटीएम घोटाला!" "कौन जिम्मेदार?"
2017 में 50 लाख से लगे वॉटर एटीएम आज उखाड़े गए, जनता का पैसा बर्बाद होने पर उठे सवाल
रायगढ़ शहर में नगर निगम द्वारा लगाए गए वॉटर एटीएम अब पूरी तरह फेल होते नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि जिन मशीनों को लाखों रुपये खर्च कर जनता की सुविधा के लिए लगाया गया था, उन्हें आज उखाड़कर कबाड़ में डाल दिया गया है। इस पूरे मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में शहर के प्रमुख स्थानों—बस स्टैंड, कबीर चौक, अंबेडकर चौक सहित अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगभग 50 लाख रुपये की लागत से 5 वॉटर एटीएम लगाए गए थे। प्रत्येक मशीन की कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई जाती है और इन पर 3 साल की वारंटी भी थी।
मेंटेनेंस में लापरवाही या योजनाबद्ध अनदेखी? वारंटी खत्म होते ही इन मशीनों की देखरेख लगभग बंद हो गई। धीरे-धीरे सभी वॉटर एटीएम खराब हो गए और अंततः उन्हें हटाकर कबाड़ में डाल दिया गया। सवाल उठता है कि जब यह योजना बनाई गई थी, तब क्या इसके दीर्घकालिक संचालन और मेंटेनेंस की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई थी?
कौन है जिम्मेदार?
जिन अधिकारियों ने यह योजना पास की, उनकी क्या जवाबदेही तय होगी?
किस कंपनी से यह मशीनें खरीदी गई थीं और क्या गुणवत्ता जांच हुई थी?
मेंटेनेंस के लिए नियुक्त एजेंसी ने अपना काम क्यों नहीं किया?
क्या यह पूरा मामला केवल कमीशनखोरी का उदाहरण है?
जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा? आज जब शहर में गर्मी बढ़ रही है और तापमान 55 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है, ऐसे में पानी जैसी मूलभूत सुविधा का इस तरह ठप हो जाना आम नागरिकों के साथ अन्याय है। जिन वॉटर एटीएम से लोगों को राहत मिलनी थी, वही अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की मिसाल बन गए हैं।
वर्तमान अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल मौजूदा जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे इस पूरे मामले की जांच कराएं, दोषियों की पहचान करें और जनता के पैसे की भरपाई सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।