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25 मार्च को शिकायत… 13 अप्रैल को जनदर्शन… 6 मई को आदेश… फिर भी कैदीमूड़ा की शासकीय भूमि पर कॉलोनाइज़र की कॉलोनी! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल?
रायगढ़। नगर निगम क्षेत्र के कैदीमूड़ा वार्ड क्रमांक 30 में शासकीय भूमि एवं सार्वजनिक प्राकृतिक नाले पर कथित अतिक्रमण कर कॉलोनाइज़र द्वारा कॉलोनी विकसित किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि शिकायत, जनदर्शन और विभागीय आदेश के बावजूद आज तक न तो सीमांकन हुआ और न ही कथित अतिक्रमण पर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे रही है। इस बीच स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉलोनाइज़र ने मौके पर कॉलोनी का विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ा दिया है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार मोहल्लावासियों ने 25 मार्च 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), रायगढ़ को लिखित शिकायत देकर खसरा क्रमांक 221/1 एवं 221/ख की शासकीय भूमि तथा सार्वजनिक प्राकृतिक नाले पर कथित अतिक्रमण की शिकायत की थी। शिकायत में राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कर शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराने तथा प्राकृतिक नाले को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई थी।
जब स्थानीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो 13 अप्रैल 2026 को शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत कर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद 6 मई 2026 को एसडीएम कार्यालय से संबंधित अधिकारियों को सीमांकन कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए।
लेकिन सवाल यह है कि आदेश के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय आदेश जारी होने के बावजूद मौके पर न तो सीमांकन कराया गया और न ही कथित अतिक्रमण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए। उल्टा इस दौरान कॉलोनाइज़र द्वारा कॉलोनी विकसित किए जाने का कार्य लगातार आगे बढ़ता रहा, जिससे अब पूरा मामला और गंभीर हो गया है।
मोहल्लावासियों का कहना है कि यदि वास्तव में शासकीय भूमि एवं प्राकृतिक नाले पर कॉलोनी विकसित की गई है, तो आने वाले समय में बरसात के दौरान प्राकृतिक जल निकासी बाधित हो सकती है। इससे आसपास के क्षेत्रों में जलभराव, आवागमन में परेशानी तथा जन-धन की हानि जैसी समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि राजस्व, नगर निगम एवं संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित कर तत्काल सीमांकन कराया जाए। यदि जांच में शासकीय भूमि या प्राकृतिक नाले पर अतिक्रमण कर कॉलोनी विकसित किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कॉलोनाइज़र एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
जनता पूछ रही है…
- शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- जनदर्शन के आदेश का पालन किस कारण लंबित है?
- आदेश के बाद भी कॉलोनी का विकास कार्य कैसे चलता रहा?
- यदि शासकीय भूमि और नाले पर निर्माण हुआ है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
अब पूरे मामले पर शहरवासियों की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
— Jantatop.Com






