रायगढ़। वेदांता पावर प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब एक और गंभीर मामला सामने आया है। बॉयलर अटेंडेंट डेवलपर्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि बिना स्थल निरीक्षण और वास्तविक परीक्षण के ही बॉयलर संचालन से जुड़े प्रमाणपत्र जारी किए गए। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि हजारों श्रमिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ का मामला है।
14 अप्रैल को हुए वेदांता हादसे में कई श्रमिकों की जान गई और कई घायल हुए थे। इस घटना के बाद औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि बॉयलर जैसे अत्यंत संवेदनशील उपकरणों के संचालन के लिए निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। बिना उचित निरीक्षण और प्रशिक्षण के प्रमाणपत्र जारी करना भविष्य में बड़े हादसों को न्योता देने जैसा है।
सवाल जो पूरे जिले को पूछने चाहिए
क्या औद्योगिक सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित हो गई है?
क्या निरीक्षण की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
क्या श्रमिकों की जान की कीमत सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गई है?
जनता की सुरक्षा सर्वोपरि
रायगढ़ देश का महत्वपूर्ण औद्योगिक जिला है। यहां सैकड़ों उद्योगों में हजारों लोग प्रतिदिन काम करते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता पूरे जिले के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
“सुरक्षा में लापरवाही का मतलब सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि किसी के घर का चिराग बुझ जाना भी हो सकता है।”
Jantatop.Com की मांग:
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।
दोषियों की जवाबदेही तय की जाए।
सभी उद्योगों के सुरक्षा प्रमाणपत्रों की दोबारा समीक्षा हो।
श्रमिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
— Jantatop.Com | जनहित में जन-जागरण अभियान






