रायगढ़। 14 अप्रैल 2026 को वेदांता पावर प्लांट, सिंघीतराई में हुआ हादसा केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं था, बल्कि 25 परिवारों के सपनों, उम्मीदों और जीवन पर लगा ऐसा घाव था, जो शायद कभी नहीं भर पाएगा।
लेकिन हादसे के बाद जो तस्वीर सामने आ रही है, वह हादसे से भी ज्यादा डराने वाली है।
एक तरफ 25 श्रमिकों की मौत हुई, दूसरी तरफ जांच प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और प्रमाणन प्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी व्यवस्था अपनी गलतियों से सीखने के बजाय उन्हें छिपाने में लगी हुई है?
हादसा इतना बड़ा, लेकिन जांच इतनी कमजोर क्यों?
सामने आई जानकारियों और लगाए गए आरोपों के अनुसार, जांच समिति में बॉयलर और प्रेशर वेसल जैसे विषयों के तकनीकी विशेषज्ञ शामिल नहीं थे।
अब सवाल यह है कि यदि जांच करने वालों के पास संबंधित तकनीकी विशेषज्ञता ही नहीं होगी, तो आखिर वे हादसे की वास्तविक वजह तक कैसे पहुंचेंगे?
क्या यह केवल औपचारिकता निभाने वाली जांच थी?
बिना स्थल निरीक्षण प्रमाणपत्र देने के आरोप
बॉयलर अटेंडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि बिना वास्तविक स्थल निरीक्षण के ही प्रमाणपत्र जारी किए गए।
अगर यह आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि हजारों श्रमिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।
क्योंकि बॉयलर कोई साधारण मशीन नहीं है, बल्कि एक ऐसा उपकरण है जिसकी छोटी सी चूक भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है।
उद्योग चल रहे हैं या जोखिम?
रायगढ़ देश के प्रमुख औद्योगिक जिलों में शामिल है। यहां हजारों लोग रोज अपनी आजीविका के लिए उद्योगों पर निर्भर हैं।
लेकिन अब आम लोगों के मन में एक डर पैदा हो गया है।
क्या सुरक्षा केवल फाइलों में मौजूद है?
क्या निरीक्षण केवल हस्ताक्षर तक सीमित हो गया है?
क्या श्रमिकों की जान की कीमत एक कागजी प्रक्रिया से भी कम हो गई है?
जनता पूछ रही है…
25 मौतों का असली जिम्मेदार कौन है?
क्या तकनीकी खामियों को पहले से नजरअंदाज किया गया?
क्या बिना विशेषज्ञों के जांच पूरी कर ली जाएगी?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन की जवाबदेही तय होगी?
क्या भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा नहीं होंगे, इसकी कोई गारंटी है?
अजीब व्यवस्था है…
जब सब कुछ ठीक रहता है तो श्रेय लेने वालों की लाइन लग जाती है।
लेकिन जब 25 परिवार उजड़ जाते हैं, तब जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं मिलता।
जांच होती है, समितियां बनती हैं, फाइलें चलती हैं, बयान आते हैं… और धीरे-धीरे लोगों की याददाश्त पर भरोसा करके मामला ठंडा करने की कोशिश शुरू हो जाती है।
लेकिन रायगढ़ अब सवाल पूछ रहा है और जवाब मांग रहा है।
जनता की मांग
स्वतंत्र राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी जांच हो।
सभी सुरक्षा प्रमाणपत्रों का पुनः सत्यापन किया जाए।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
दोषियों की जवाबदेही तय हो।
कलम का सवाल
“25 मौतों के बाद अगर व्यवस्था नहीं जागी, तो फिर उसे जगाने के लिए कितनी चिताएँ और जलानी पड़ेंगी?”






