रायगढ़
सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा द्वारा गारे पेल्मा ओपनकास्ट कोयला परियोजना की प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई 19 मई को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर को आवेदन ईमेल के माध्यम से प्रेषित किया गया है।
आवेदन में परियोजना से जुड़े गंभीर पर्यावरणीय, कानूनी एवं प्रक्रियागत सवाल उठाते हुए जनसुनवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि उपलब्ध टोपोशीट एवं सार्वजनिक दस्तावेजों के अध्ययन से यह प्रतीत होता है कि जीवनदायिनी केलो नदी परियोजना के प्रभाव क्षेत्र के भीतर आती है, जिससे भविष्य में नदी अथवा उससे जुड़े जलमार्गों के डायवर्जन की आशंका गंभीर रूप से उत्पन्न होती है। इसके बावजूद अब तक River Diversion Plan, Hydrological Study एवं Groundwater Impact Report जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
दीपक शर्मा ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि परियोजना का कुल क्षेत्र लगभग 2077.934 हेक्टेयर है, जिसमें लगभग 361 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होने की संभावना है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार घने जंगलों में प्रति हेक्टेयर लगभग 1500 से 2000 पेड़ पाए जाते हैं। इस आधार पर लगभग 5 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई की आशंका व्यक्त की गई है।
दीपक शर्मा ने न्यायालय को यह भी अवगत कराया है कि उपलब्ध EIA रिपोर्टों के अध्ययन से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि रिपोर्ट तैयार करने वाली कंसल्टेंट कंपनियों द्वारा स्थानीय पर्यावरणीय एवं सामाजिक परिस्थितियों का समुचित वैज्ञानिक अध्ययन किए बिना औपचारिक एवं कॉपी-पेस्ट प्रकृति की रिपोर्ट तैयार की गई है। आवेदन में इस संबंध में स्वतंत्र तकनीकी एवं पर्यावरणीय जांच कराने की मांग भी की गई है।
आवेदन में न्यायालय से मांग की गई है कि:
– प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए
– जिला कलेक्टर रायगढ़ को तत्काल इस जनसुनवाई को स्थगित कर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं.
– सभी पर्यावरणीय एवं तकनीकी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं
– EIA रिपोर्ट एवं संबंधित कंसल्टेंट कंपनियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए
– प्रभावित ग्रामीणों एवं स्थानीय नागरिकों को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए
दीपक शर्मा ने कहा कि यह मामला केवल एक खदान परियोजना का नहीं, बल्कि रायगढ़ जिले के जल, जंगल, पर्यावरण एवं आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।




