रायगढ़।
केनाल लिंक से अब सियासी लिंक
रायगढ़ का बहुचर्चित “केनाल लिंक” प्रोजेक्ट अब सिर्फ सड़क निर्माण का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह मुद्दा धीरे-धीरे शहर की सबसे बड़ी सियासी लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है।
पहले जनता सवाल उठा रही थी, अब विपक्ष खुलकर मैदान में उतर आया है।
करीब ₹22.55 करोड़ की इस परियोजना को लेकर पहले ही “नाम केनाल का, खेल सड़क का” जैसे सवाल उठ रहे थे। अब कांग्रेस पार्षद एवं पूर्व सभापति जयंत ठेठवार ने इस योजना के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
JantaTop से बातचीत में जयंत ठेठवार ने कहा कि यह परियोजना “विकास” से ज्यादा “विस्थापन” की पटकथा लिखती नजर आ रही है। उनके मुताबिक आने वाले समय में इस सड़क परियोजना की जद में कई घर और दुकानें आ सकती हैं।
उन्होंने महापौर की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को भरोसे में लिए बिना योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
“सुनवाई हुई जरूर, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं” — यही स्थिति इस पूरे मामले में दिखाई दे रही है।
“22 करोड़ का टेंडर… और मैदान में सिर्फ एक खिलाड़ी?”
शहर में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि आखिर इतने बड़े प्रोजेक्ट में केवल एक ही टेंडर कैसे आया?
अब लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं —
“दाल में कुछ काला है… या पूरी दाल ही काली है?”
सूत्रों की मानें तो इस प्रोजेक्ट में केनाल/नाले का हिस्सा बेहद कम और सड़क निर्माण का हिस्सा ज्यादा बताया जा रहा है। ऐसे में जनता के बीच यह चर्चा और तेज हो गई है कि आखिर “केनाल लिंक” नाम के पीछे असली तस्वीर क्या है?
“विकास चाहिए… विनाश नहीं”
इंदिरा नगर-जोगीडीपा क्षेत्र के कई रहवासियों और दुकानदारों में डर का माहौल बताया जा रहा है। लोगों को आशंका है कि प्रस्तावित चौड़ी सड़क और पुल निर्माण की जद में वर्षों पुराने मकान और दुकानें आ सकती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि:
«“रोजी-रोटी उजाड़कर विकास होगा तो फायदा आखिर किसका?”»
⚠️ कांग्रेस की चेतावनी — “सड़क पर उतरेंगे”
जयंत ठेठवार ने साफ कहा कि यदि जनता के आशियाने पर बुलडोजर चलाने की कोशिश हुई, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।
उन्होंने संकेत दिए कि पार्टी पहले से आंदोलन की तैयारी में है और जरूरत पड़ी तो बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
सियासी गलियारों में अब यह भी चर्चा है कि जिस क्षेत्र से महापौर को सबसे ज्यादा समर्थन मिला था, वहीं अब सबसे ज्यादा नाराजगी दिखाई देने लगी है।
यानी अब मामला सिर्फ सड़क का नहीं, बल्कि राजनीतिक भरोसे का भी बन चुका है।
अब सबसे बड़े सवाल
👉 प्रभावित परिवारों का पुनर्वास कैसे होगा?
👉 मुआवज़ा किसे और कितना मिलेगा?
👉 क्या जनता की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार हुआ?
👉 और आखिर 22 करोड़ के प्रोजेक्ट में प्रतिस्पर्धा के बजाय सिर्फ एक ही ठेकेदार क्यों सामने आया?
फिलहाल शहर में चर्चा तेज है, सियासत गरम है और जनता जवाब मांग रही है।
अब देखना होगा कि यह प्रोजेक्ट रायगढ़ को नई सड़क देगा…
या फिर आने वाले दिनों में नया सियासी तूफान खड़ा करेगा।
📺 इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता जयंत ठेठवार का पूरा वीडियो बयान जल्द JantaTop.Com के YouTube चैनल पर अपडेट किया जाएगा।




