Jantatop.Com | विशेष जन-जागरण रिपोर्ट
रायगढ़, 25 जून। देश के कई शहरों में हाल के वर्षों में आगजनी की दर्दनाक घटनाओं ने सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया। अब रायगढ़ जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है। प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि अगले सात दिनों के भीतर शहर के प्रमुख भवनों और संस्थानों की फायर सेफ्टी जांच पूरी की जाए।
जांच के दायरे में कोचिंग सेंटर, स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, होटल, लॉज, अस्पताल, नर्सिंग होम, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और बहुमंजिला इमारतें शामिल रहेंगी। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं सुरक्षा मानकों की अनदेखी तो नहीं हो रही।
प्रशासन भवनों में फायर एनओसी, अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, विद्युत वायरिंग और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच करेगा। जहां गंभीर खामियां मिलेंगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सबसे चिंता की बात यह है कि शहर में कई ऐसे संस्थान संचालित हो रहे हैं, जहां फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र (NOC) तक नहीं है। कई जगह अग्निशमन यंत्र या तो लगे ही नहीं हैं या वर्षों से उनका रखरखाव नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
अब सवाल सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि हजारों छात्रों, मरीजों, कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा का है। यदि यह अभियान ईमानदारी से चला, तो कई संभावित हादसों को होने से पहले रोका जा सकता है।
जनता पूछ रही है…
क्या बिना फायर एनओसी वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई होगी?
क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या वास्तव में खामियां दूर कराई जाएंगी?
जिन भवनों में सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं, उन्हें संचालन की अनुमति किस आधार पर मिली?
क्या प्रशासन जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा ताकि नागरिक भी सच्चाई जान सकें?






