रायगढ़ की सांसों पर सबसे बड़ा हमला? शहर से चंद कदम दूर 50 मेगावाट पावर प्लांट और स्टील उद्योग का महाविस्तार, अब नहीं जागे तो देर हो जाएगी!
तमनार, पूंजीपथरा और धरमजयगढ़ के बाद अब शहर की दहलीज पर उद्योगों का दबाव; गढ़उमरिया-दर्रामुड़ा परियोजना पर उठे बड़े सवाल, जनसुनवाई में रायगढ़वासियों की भागीदारी जरूरी
Jantatop.Com | रायगढ़
रायगढ़वासियों, क्या आपने सोचा है कि आने वाले 10 से 20 वर्षों में आपके बच्चे कैसी हवा में सांस लेंगे?
यह सवाल इसलिए क्योंकि शहर से चंद कदमों की दूरी पर स्थित गढ़उमरिया और दर्रामुड़ा क्षेत्र में एक विशाल औद्योगिक परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव सामने आया है। मेसर्स रुंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड यहां फेरो अलॉय संयंत्र के विस्तार के साथ एकीकृत इस्पात संयंत्र और 50 मेगावाट क्षमता का कैप्टिव पावर प्लांट स्थापित करना चाहती है।
करीब 814.5 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना 11.029 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी।
रायगढ़ के सामने सबसे बड़ा सवाल
तमनार, पूंजीपथरा, घरघोड़ा और धर्मजयगढ़ जैसे क्षेत्रों में वर्षों से उद्योग संचालित हो रहे हैं। समय-समय पर प्रदूषण, धूल, राख और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में शहर से बेहद नजदीक एक और बड़े औद्योगिक परिसर का प्रस्ताव लोगों की चिंता बढ़ा रहा है।
आखिर यहां क्या-क्या लगेगा?
– 2.145 लाख टन प्रतिवर्ष डीआरआई प्लांट
– 2.24 लाख टन प्रतिवर्ष स्टील मेल्टिंग शॉप
– 2 लाख टन प्रतिवर्ष रोलिंग मिल
– 42,900 टन प्रतिवर्ष फेरो अलॉय यूनिट
– 200 टन प्रतिदिन सिंटर प्लांट
– 10 टन प्रति घंटा मेटल रिकवरी यूनिट
– 15 टन प्रति घंटा रीहीटिंग फर्नेस
– 50 मेगावाट क्षमता का कैप्टिव पावर प्लांट
सवाल सिर्फ उद्योग का नहीं, रायगढ़ की सांसों का है
यह जनसुनवाई केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवन गुणवत्ता से जुड़ा फैसला है।
हैरानी की बात यह भी है कि जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में होने वाली जनसुनवाई का विरोध करने पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक संगठन सक्रिय नजर आते हैं, लेकिन शहर की दहलीज पर प्रस्तावित इस विशाल परियोजना को लेकर अब तक वैसी मुखरता दिखाई नहीं दे रही है।
जनसुनवाई में रायगढ़वासियों को ये सवाल जरूर पूछने चाहिए
• प्रतिदिन कितने पानी की खपत होगी और उसका स्रोत क्या होगा?
• वायु प्रदूषण रोकने के लिए कौन-कौन सी तकनीकें लगाई जाएंगी?
• फ्लाई ऐश और औद्योगिक कचरे का निपटान कहां होगा?
• स्थानीय युवाओं को रोजगार में कितना अवसर मिलेगा?
• पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर जवाबदेह कौन होगा?
• सबसे महत्वपूर्ण – क्या शहर से सटे क्षेत्र में इतनी बड़ी भारी औद्योगिक परियोजना जनहित में है?
फैसला आज होगा, असर आने वाले कई दशकों तक रहेगा
रायगढ़वासियों के सामने यह सिर्फ एक उद्योग की स्थापना का मामला नहीं है। यह तय करने का समय है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
अगर जनता आज अपनी आवाज नहीं उठाएगी, तो आने वाले वर्षों में उसके परिणाम पूरे शहर को भुगतने पड़ सकते हैं।
जनसुनवाई में शामिल हों, सवाल पूछें और अपने शहर के भविष्य को लेकर जागरूक नागरिक की भूमिका निभाएं